उत्तराखंड की संस्कृति #2 : पारंपरिक परिधान

उत्तराखण्ड में मूलतः दो प्रकार के पारंपरिक परिधान पाए जाते हैं: कुमाऊँनी परिधान और गढ़वाली परिधान

कुमाऊ व गढ़वाल क्षेत्र के लोगों द्वारा पहनें जाने वाले पारम्परिक परिधान इस प्रकार है –


  • कुमाऊँनी पुरुषों के परिधान :-   धोती, पैजामा, सुराव, कोट, कुर्त्ता, भोटू, कमीज मिरजै, टांक (साफा) टोपी आदि।
  • कुमाऊँनी स्त्रियों के परिधान :- घाघरा, लहंगा, आंगडी, खानू, चोली, धोती, पिछौड़ा आदि।
  • कुमाऊँनी बच्चों की परिधान :-   झगुली, झगुल कोट, संतराथ आदि।
  • गढ़वाली पुरुषों के परिधान :- धोती, चूड़ीदार पैजामा, कुर्त्ता, मिरजई, सफेद टोपी, पगडी,  बास्कट, गुलबंद आदि।
  • गढ़वाली स्त्रियों के परिधान :- आंगड़ी, गाती, धोती, पिछौड़ा आदि।
  • गढ़वाली बच्चों के परिधान :- झगुली, घाघरा, कोट, चूड़ीदार पजामा, संतराथ आदि।

उत्तराखंड के प्रमुख पारम्परिक आभूषण

उत्तराखंड के महिलाओं के द्वारा पहने जाने वालें प्रमुख आभूषण इस प्रकार है –

  • माथे पर       –        सीसफुल, बंदी, सुहाग बिन्दी।
  • कान पर       –        मुर्खली (मुर्खी), बुजनी, तुग्यल, मुनाड, मुदुडें।
  • नाक पर       –        फूली, नथुली/नथ, बुलांक, फुल्की।
  • गले पर                तिलहरी, चन्द्रहार, लाकेट, हंसुला, सूत, गुलबंद, चरे।
  • कंधे पर        –        स्यूण-सांगल।
  • कमर पर      –        कमर ज्यौड़ि, तगडी (तिगडी)।
  • हाथ पर        –        धगुला, खंडवे, गुंठी, ठ्वाक।
  • कलाई पर    –        पौछी (पहुंची)।
  • बाजू पर       –        गोंखले।
  • पैरो पर        –        पौटा, झांवर, अमिर्तीतार, इमरती, प्वाल्या (विछुवा)।

उत्तराखंड के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान :-

उत्तराखंड के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान निम्नलिखित है –

  • संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद (Culture, Literature and Arts Council) – देहरादून
  • संस्कृत अकादमी (Sanskrit Academy) – हरिद्वार
  • राज्य अभिलेखागार (State Archives) – देहरादून
  • रंगमण्डल – देहरादून व अल्मोड़ा
  • उदय शंकर नृत्य एवं नाट्य अकादमी (Uday Shankar Dance and Drama Academy) – अल्मोड़ा
  • भातखंडे हिंदुस्तानी संगीत संस्थान (Bhatkhande Hindustani Music Institute) –देहरादून
  • लोक कला संस्थान (Folk Art Institute) – अल्मोड़ा

4 thoughts on “उत्तराखंड की संस्कृति #2 : पारंपरिक परिधान”

  1. Dear Sir, the content is good, but if the photos of the particulars are available with their names, then that would be much easier to understand and rememberable. I tried to find on Google but failed in searching.

    1. Dear Shalabh,
      Thanks for the comment. We have taken note of your valuable suggestion and would try to incorporate the same in our website.
      Regards,
      Pawan

    1. जयेंद्र जी,
      आपके कमेंट के लिए धन्यवाद ! आपका सुझाव अगली बार पोस्ट करते हुए ध्यान में रखा जाएगा |
      धन्यवाद सहित,
      पवन|

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